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mahabharat 1.110.10: इधर भगवान सूर्य उसके पास आए और बोले, 'हे श्यामवर्णी कुन्ती! मैं आया हूँ। कहो, तुम्हारा कौन-सा प्रिय कार्य मैं करूँ?॥10॥   |   mahabharat अध्याय 1.110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.110.10 
तां समासाद्य देवस्तु विवस्वानिदमब्रवीत्।
अयमस्म्यसितापाङ्गि ब्रूहि किं करवाणि ते॥ १०॥
 
 
अनुवाद
इधर भगवान सूर्य उसके पास आए और बोले, 'हे श्यामवर्णी कुन्ती! मैं आया हूँ। कहो, तुम्हारा कौन-सा प्रिय कार्य मैं करूँ?॥10॥
 
Here Lord Surya came to her and said, 'O dark-eyed Kunti! I have come. Tell me, which of your favourite tasks should I do?॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)