श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 11: डुण्डुभकी आत्मकथा तथा उसके द्वारा रुरुको अहिंसाका उपदेश  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.11.9 
यत्तु वक्ष्यामि ते वाक्यं शृणु तन्मे तपोधन।
श्रुत्वा च हृदि ते वाक्यमिदमस्तु सदानघ॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे निष्पाप तपस्वी! इस समय मैं जो कुछ तुमसे कहूँ, उसे सुनो और उसे सदा अपने हृदय में धारण करो॥9॥
 
'O sinless ascetic! Listen to whatever I tell you at this time and keep it in your heart forever.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)