Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.11.12-13: ऐसा कहकर महाविप्रवर सहस्रपाद ने दुन्दुभ का रूप त्यागकर पुनः अपने तेजस्वरूप को प्राप्त किया। फिर उन्होंने अतुलनीय तेज वाले रुरु से यह कहा - 'ब्राह्मण समस्त प्राणियों में श्रेष्ठ है! अहिंसा ही सर्वोत्तम धर्म है।' 12-13॥ | mahabharat अध्याय 1.11: डुण्डुभकी आत्मकथा तथा उसके द्वारा रुरुको अहिंसाका उपदेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ऐसा कहकर महाविप्रवर सहस्रपाद ने दुन्दुभ का रूप त्यागकर पुनः अपने तेजस्वरूप को प्राप्त किया। फिर उन्होंने अतुलनीय तेज वाले रुरु से यह कहा - 'ब्राह्मण समस्त प्राणियों में श्रेष्ठ है! अहिंसा ही सर्वोत्तम धर्म है।' 12-13॥
Having said this, the great Vipravar Sahasrapada left the form of Dundubha and again attained his luminous form. Then he said this to Ruru, one with incomparable vigor – 'Brahmin is the best among all living beings! Non-violence is the best religion. 12-13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥