श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 11: डुण्डुभकी आत्मकथा तथा उसके द्वारा रुरुको अहिंसाका उपदेश  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.11.10 
उत्पत्स्यति रुरुर्नाम प्रमतेरात्मज: शुचि:।
तं दृष्ट्वा शापमोक्षस्ते भविता नचिरादिव॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘भविष्य में महर्षि प्रमति के यहां पुण्य पुत्र रुरु का जन्म होगा, उसके दर्शन पाकर तुम शीघ्र ही इस शाप से मुक्त हो जाओगे।’ 10॥
 
'In the future, the holy son Ruru will be born to Maharishi Pramati, after seeing him you will soon get rid of this curse.' 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)