Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.11.1-2: दुन्दुब ने कहा - पिताश्री ! पूर्वकाल में खगम नामक एक ब्राह्मण मेरा मित्र था । महान आध्यात्मिक शक्तियों से संपन्न होने पर भी वह बहुत कठोर वचन बोलता था । एक दिन वह अग्निहोत्र कर रहा था । मैंने मस्ती में आकर उसे तिनके का साँप बनाकर डरा दिया । वह भय के मारे मूर्छित हो गया ॥1-2॥ | mahabharat अध्याय 1.11: डुण्डुभकी आत्मकथा तथा उसके द्वारा रुरुको अहिंसाका उपदेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
डुण्डुभ उवाच
सखा बभूव मे पूर्वं खगमो नाम वै द्विज:।
भृशं संशितवाक् तात तपोबलसमन्वित:॥ १॥
स मया क्रीडता बाल्ये कृत्वा तार्णं भुजङ्गमम्।
अग्निहोत्रे प्रसक्तस्तु भीषित: प्रमुमोह वै॥ २॥
अनुवाद
दुन्दुब ने कहा - पिताश्री ! पूर्वकाल में खगम नामक एक ब्राह्मण मेरा मित्र था । महान आध्यात्मिक शक्तियों से संपन्न होने पर भी वह बहुत कठोर वचन बोलता था । एक दिन वह अग्निहोत्र कर रहा था । मैंने मस्ती में आकर उसे तिनके का साँप बनाकर डरा दिया । वह भय के मारे मूर्छित हो गया ॥1-2॥
Dundub said - Father! In the olden days a Brahmin by the name of Khagam was my friend. Despite being endowed with great spiritual powers, he used to speak very harsh words. One day he was engaged in Agnihotra. In fun, I made a snake out of straw and frightened him. He fainted out of fear.॥1-2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥