Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.109.9-11: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! इसके बाद भीष्मजी ने ब्राह्मणों से गांधारराज सुबल की पुत्री शुभलक्षणा गांधारी के विषय में सुना कि उसने भगदेवता के नेत्रों को नष्ट करने वाले वरदाता भगवान शंकर की आराधना करके सौ पुत्रों का वरदान प्राप्त किया है। भारत! जब यह बात निश्चित रूप से ज्ञात हुई, तब कुरु पितामह भीष्म ने अपना दूत गांधारराज के पास भेजा। सुबलजी को इस बात की बड़ी चिंता हुई कि धृतराष्ट्र अंधे हैं॥9-11॥ | mahabharat अध्याय 1.109: राजा धृतराष्ट्रका विवाह । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! इसके बाद भीष्मजी ने ब्राह्मणों से गांधारराज सुबल की पुत्री शुभलक्षणा गांधारी के विषय में सुना कि उसने भगदेवता के नेत्रों को नष्ट करने वाले वरदाता भगवान शंकर की आराधना करके सौ पुत्रों का वरदान प्राप्त किया है। भारत! जब यह बात निश्चित रूप से ज्ञात हुई, तब कुरु पितामह भीष्म ने अपना दूत गांधारराज के पास भेजा। सुबलजी को इस बात की बड़ी चिंता हुई कि धृतराष्ट्र अंधे हैं॥9-11॥
Vaishampayana says - Janamejaya! After this, Bhishma heard from the Brahmins about the daughter of Gandhar king Subal, Shubhlakshana Gandhari, that she had obtained the boon of having hundred sons for herself by worshipping the boon-giver Lord Shankar, who destroyed the eyes of Bhagdevata. Bhaarat! When this was known for sure, then Kuru Pitamaha Bhishma sent his messenger to Gandhar king. Subal was deeply concerned about the fact that Dhritarashtra is blind.॥9-11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥