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mahabharat 1.109.3: (बीच में संकट का समय भी आया, परन्तु) मैंने, माता सत्यवती ने और महात्मा श्रीकृष्ण द्वैपायन व्यासजी ने मिलकर इस कुल की पुनः स्थापना की है। तुम तीनों भाई इस कुल के आधारस्तंभ हो और अब इसकी प्रतिष्ठा तुम पर ही टिकी है॥3॥   |   mahabharat अध्याय 1.109: राजा धृतराष्ट्रका विवाह   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 109: राजा धृतराष्ट्रका विवाह  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.109.3 
मया च सत्यवत्या च कृष्णेन च महात्मना।
समवस्थापितं भूयो युष्मासु कुलतन्तुषु॥ ३॥
 
 
अनुवाद
(बीच में संकट का समय भी आया, परन्तु) मैंने, माता सत्यवती ने और महात्मा श्रीकृष्ण द्वैपायन व्यासजी ने मिलकर इस कुल की पुनः स्थापना की है। तुम तीनों भाई इस कुल के आधारस्तंभ हो और अब इसकी प्रतिष्ठा तुम पर ही टिकी है॥3॥
 
(There was a time of crisis in between but) I, mother Satyavati and great soul Shri Krishna Dwaipayan Vyasji together have re-established this clan. You three brothers are the pillars of this clan and now its prestige rests on you.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)