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mahabharat 1.109.19: इस प्रकार अपने सुन्दर आचरण से समस्त गुरुजनों का सुख प्राप्त करने वाली और उत्तम व्रतों का पालन करने वाली पतिव्रता गांधारी ने कभी अन्य पुरुषों का नाम भी नहीं लिया ॥19॥   |   mahabharat अध्याय 1.109: राजा धृतराष्ट्रका विवाह   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 109: राजा धृतराष्ट्रका विवाह  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.109.19 
वृत्तेनाराध्य तान् सर्वान् गुरून् पतिपरायणा।
वाचापि पुरुषानन्यान् सुव्रता नान्वकीर्तयत्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अपने सुन्दर आचरण से समस्त गुरुजनों का सुख प्राप्त करने वाली और उत्तम व्रतों का पालन करने वाली पतिव्रता गांधारी ने कभी अन्य पुरुषों का नाम भी नहीं लिया ॥19॥
 
In this way, Gandhari, the husband-loving lady who obtained the happiness of all the teachers by her beautiful behavior and followed the best fasts, never even took the names of other men. 19॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि धृतराष्ट्रविवाहे नवाधिकशततमोऽध्याय:॥ १०९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें धृतराष्ट्रविवाहविषयक एक सौ नवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)