Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.109.13-16: जनमेजय! जब गांधारी ने सुना कि धृतराष्ट्र अंधे हैं और उनके माता-पिता उनका विवाह उनसे कराना चाहते हैं, तो उन्होंने एक रेशमी वस्त्र लिया, उसे कई तहों में मोड़ा और उससे अपनी आँखें ढँक लीं। हे राजन! गांधारी अपने पति के प्रति अत्यन्त समर्पित थीं। उन्होंने निश्चय कर लिया था कि वह (सदैव अपने पति का पक्ष लेंगी) और उनके दोषों को नहीं देखेंगी। तत्पश्चात, एक दिन गांधार के राजकुमार शकुनि अपनी बहन गांधारी, जो कि युवा थीं और देवी लक्ष्मी के समान आकर्षक थीं, के साथ कौरवों के पास गए और अपनी बहन को बड़े आदर और सम्मान के साथ धृतराष्ट्र को सौंप दिया। शकुनि ने भीष्म की सलाह के अनुसार विवाह समारोह सम्पन्न कराया। | mahabharat अध्याय 1.109: राजा धृतराष्ट्रका विवाह । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जनमेजय! जब गांधारी ने सुना कि धृतराष्ट्र अंधे हैं और उनके माता-पिता उनका विवाह उनसे कराना चाहते हैं, तो उन्होंने एक रेशमी वस्त्र लिया, उसे कई तहों में मोड़ा और उससे अपनी आँखें ढँक लीं। हे राजन! गांधारी अपने पति के प्रति अत्यन्त समर्पित थीं। उन्होंने निश्चय कर लिया था कि वह (सदैव अपने पति का पक्ष लेंगी) और उनके दोषों को नहीं देखेंगी। तत्पश्चात, एक दिन गांधार के राजकुमार शकुनि अपनी बहन गांधारी, जो कि युवा थीं और देवी लक्ष्मी के समान आकर्षक थीं, के साथ कौरवों के पास गए और अपनी बहन को बड़े आदर और सम्मान के साथ धृतराष्ट्र को सौंप दिया। शकुनि ने भीष्म की सलाह के अनुसार विवाह समारोह सम्पन्न कराया।
Janamejaya! When Gandhari heard that Dhritarashtra was blind and her parents wanted to marry her to him, she took a silken cloth, folded it in several folds and covered her eyes with it. O King! Gandhari was very devoted to her husband. She had decided that she would (always be favorable to her husband,) and would not see his faults. Thereafter, one day Gandhara's prince Shakuni went to the Kauravas with his sister Gandhari who was young and had the charm of Goddess Lakshmi and handed over his sister to Dhritarashtra with great respect and honour. Shakuni completed the marriage ceremony as per Bhishma's advice.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥