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mahabharat 1.108.8: कौरवों का वह नगर समुद्र के समान सब प्रकार से परिपूर्ण था, तथा बादलों के समूह के समान बड़े-बड़े द्वारों, फाटकों और गोपुरमों से सुशोभित था।   |   mahabharat अध्याय 1.108: धृतराष्ट्र आदिके जन्म तथा भीष्मजीके धर्मपूर्ण शासनसे कुरुदेशकी सर्वांगीण उन्नतिका दिग्दर्शन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 108: धृतराष्ट्र आदिके जन्म तथा भीष्मजीके धर्मपूर्ण शासनसे कुरुदेशकी सर्वांगीण उन्नतिका दिग्दर्शन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.108.8 
तन्महोदधिवत् पूर्णं नगरं वै व्यरोचत।
द्वारतोरणनिर्यूहैर्युक्तमभ्रचयोपमै:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
कौरवों का वह नगर समुद्र के समान सब प्रकार से परिपूर्ण था, तथा बादलों के समूह के समान बड़े-बड़े द्वारों, फाटकों और गोपुरमों से सुशोभित था।
 
The Kaurava city, full in every way like the ocean, was decorated with large doors, gates and gopurams like groups of clouds. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)