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mahabharat 1.108.5: कोई भी व्यक्ति डाकू नहीं था। पाप में रुचि रखने वाले लोगों का सर्वथा अभाव था। देश के विभिन्न प्रांतों में सत्ययुग व्याप्त था॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.108: धृतराष्ट्र आदिके जन्म तथा भीष्मजीके धर्मपूर्ण शासनसे कुरुदेशकी सर्वांगीण उन्नतिका दिग्दर्शन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.108.5 
नाभवन् दस्यव: केचिन्नाधर्मरुचयो जना:।
प्रदेशेष्वपि राष्ट्राणां कृतं युगमवर्तत॥ ५॥
 
 
अनुवाद
कोई भी व्यक्ति डाकू नहीं था। पाप में रुचि रखने वाले लोगों का सर्वथा अभाव था। देश के विभिन्न प्रांतों में सत्ययुग व्याप्त था॥5॥
 
No person was a dacoit. There was a total absence of people interested in sin. Satya Yuga was prevailing in various provinces of the nation.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)