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mahabharat 1.108.4: सभी नगर व्यापार में कुशल वैश्यों और शिल्पकला में निपुण कारीगरों से भर गए। शूरवीर, विद्वान और साधु पुरुष सुखी हो गए।   |   mahabharat अध्याय 1.108: धृतराष्ट्र आदिके जन्म तथा भीष्मजीके धर्मपूर्ण शासनसे कुरुदेशकी सर्वांगीण उन्नतिका दिग्दर्शन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.108.4 
वणिग्भिश्चान्वकीर्यन्त नगराण्यथ शिल्पिभि:।
शूराश्च कृतविद्याश्च सन्तश्च सुखिनोऽभवन्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सभी नगर व्यापार में कुशल वैश्यों और शिल्पकला में निपुण कारीगरों से भर गए। शूरवीर, विद्वान और साधु पुरुष सुखी हो गए।
 
All the cities were filled with Vaishyas who were skilled in business and craftsmen who were adept in craftsmanship. The brave, learned and saintly people became happy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)