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mahabharat 1.108.3: घोड़े और हाथी आदि वाहन स्वस्थ और बलवान थे, मृग और पक्षी सुखपूर्वक अपना दिन बिताते थे, फूलों और मालाओं में अनोखी सुगंध थी और फलों में अनोखा रस था ॥3॥   |   mahabharat अध्याय 1.108: धृतराष्ट्र आदिके जन्म तथा भीष्मजीके धर्मपूर्ण शासनसे कुरुदेशकी सर्वांगीण उन्नतिका दिग्दर्शन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 108: धृतराष्ट्र आदिके जन्म तथा भीष्मजीके धर्मपूर्ण शासनसे कुरुदेशकी सर्वांगीण उन्नतिका दिग्दर्शन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.108.3 
वाहनानि प्रहृष्टानि मुदिता मृगपक्षिण:।
गन्धवन्ति च माल्यानि रसवन्ति फलानि च॥ ३॥
 
 
अनुवाद
घोड़े और हाथी आदि वाहन स्वस्थ और बलवान थे, मृग और पक्षी सुखपूर्वक अपना दिन बिताते थे, फूलों और मालाओं में अनोखी सुगंध थी और फलों में अनोखा रस था ॥3॥
 
Horses and elephants etc. were healthy and strong vehicles, deer and birds spent their days happily, flowers and garlands had unique fragrance and fruits had unique juice. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)