श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 108: धृतराष्ट्र आदिके जन्म तथा भीष्मजीके धर्मपूर्ण शासनसे कुरुदेशकी सर्वांगीण उन्नतिका दिग्दर्शन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.108.26 
कदाचिदथ गाङ्गेय: सर्वनीतिमतां वर:।
विदुरं धर्मतत्त्वज्ञं वाक्यमाह यथोचितम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
एक समय की बात है, समस्त ज्ञानियों में श्रेष्ठ गंगापुत्र भीष्म ने धर्म के तत्त्व को जानने वाले विदुर से ये उचित वचन कहे।
 
Once upon a time, Ganga's son Bhishma, the best among all wise men, spoke these just words to Vidur, who knew the essence of religion.
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि पाण्डुराज्याभिषेकेऽष्टाधिकशततमोऽध्याय:॥ १०८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें पाण्डुराज्याभिषेकविषयक एक सौ आठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०८॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल २६ १/२ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)