एक समय की बात है, समस्त ज्ञानियों में श्रेष्ठ गंगापुत्र भीष्म ने धर्म के तत्त्व को जानने वाले विदुर से ये उचित वचन कहे।
Once upon a time, Ganga's son Bhishma, the best among all wise men, spoke these just words to Vidur, who knew the essence of religion.
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि पाण्डुराज्याभिषेकेऽष्टाधिकशततमोऽध्याय:॥ १०८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें पाण्डुराज्याभिषेकविषयक एक सौ आठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०८॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल २६ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥