Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.108.22: राजन! तीनों लोकों में विदुरजी के समान धर्मात्मा और धर्म में उच्च गति को प्राप्त (आत्मदर्शी) कोई दूसरा पुरुष नहीं था॥22॥   |   mahabharat अध्याय 1.108: धृतराष्ट्र आदिके जन्म तथा भीष्मजीके धर्मपूर्ण शासनसे कुरुदेशकी सर्वांगीण उन्नतिका दिग्दर्शन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 108: धृतराष्ट्र आदिके जन्म तथा भीष्मजीके धर्मपूर्ण शासनसे कुरुदेशकी सर्वांगीण उन्नतिका दिग्दर्शन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.108.22 
त्रिषु लोकेषु न त्वासीत् कश्चिद् विदुरसम्मित:।
धर्मनित्यस्तथा राजन् धर्मे च परमं गत:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
राजन! तीनों लोकों में विदुरजी के समान धर्मात्मा और धर्म में उच्च गति को प्राप्त (आत्मदर्शी) कोई दूसरा पुरुष नहीं था॥22॥
 
Rajan! There was no other person in the three worlds as devout as Vidurji and who had attained a high state in religion (Self-Seer). 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)