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mahabharat 1.108.18: उसने स्वयं ही अपने समस्त अनुष्ठान संपन्न कर लिए। फिर वह ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने और वेदों का अध्ययन करने में तत्पर हो गया। वह कठोर परिश्रम और व्यायाम में भी निपुण हो गया। फिर धीरे-धीरे उसे युवावस्था प्राप्त हुई॥18॥   |   mahabharat अध्याय 1.108: धृतराष्ट्र आदिके जन्म तथा भीष्मजीके धर्मपूर्ण शासनसे कुरुदेशकी सर्वांगीण उन्नतिका दिग्दर्शन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 108: धृतराष्ट्र आदिके जन्म तथा भीष्मजीके धर्मपूर्ण शासनसे कुरुदेशकी सर्वांगीण उन्नतिका दिग्दर्शन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.108.18 
संस्कारै: संस्कृतास्ते तु व्रताध्ययनसंयुता:।
श्रमव्यायामकुशला: समपद्यन्त यौवनम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उसने स्वयं ही अपने समस्त अनुष्ठान संपन्न कर लिए। फिर वह ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने और वेदों का अध्ययन करने में तत्पर हो गया। वह कठोर परिश्रम और व्यायाम में भी निपुण हो गया। फिर धीरे-धीरे उसे युवावस्था प्राप्त हुई॥18॥
 
He himself got all his rituals done. Then he became ready to follow the vow of celibacy and study the Vedas. He also became very proficient in hard work and exercise. Then gradually he attained youth.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)