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mahabharat 1.108.16: हे जनमेजय! कुरुवंश के प्रमुखों तथा नगर के अन्य निवासियों के घरों में सदैव यही शब्द सुनाई देते थे कि 'दान दो और अतिथियों को भोजन कराओ।'॥16॥   |   mahabharat अध्याय 1.108: धृतराष्ट्र आदिके जन्म तथा भीष्मजीके धर्मपूर्ण शासनसे कुरुदेशकी सर्वांगीण उन्नतिका दिग्दर्शन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.108.16 
गृहेषु कुरुमुख्यानां पौराणां च नराधिप।
दीयतां भुज्यतां चेति वाचोऽश्रूयन्त सर्वश:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे जनमेजय! कुरुवंश के प्रमुखों तथा नगर के अन्य निवासियों के घरों में सदैव यही शब्द सुनाई देते थे कि 'दान दो और अतिथियों को भोजन कराओ।'॥16॥
 
O Janamejaya! In the houses of the heads of the Kuru clan and other residents of the city, one could always hear the same words: 'Give alms and feed the guests.'॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)