श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 108: धृतराष्ट्र आदिके जन्म तथा भीष्मजीके धर्मपूर्ण शासनसे कुरुदेशकी सर्वांगीण उन्नतिका दिग्दर्शन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.108.13 
भीष्मेण धर्मतो राजन् सर्वत: परिरक्षिते।
बभूव रमणीयश्च चैत्ययूपशताङ्कित:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! भीष्मजी द्वारा सब ओर से सुरक्षित पृथ्वी पर स्थित वह कुरु देश सैकड़ों मन्दिरों और यज्ञस्तम्भों से युक्त होने के कारण अत्यन्त शोभायमान था। ॥13॥
 
Janamejaya! That Kuru country, on the earth which was protected from all sides by Bhishma, was very beautiful because it was marked by hundreds of temples and sacrificial pillars. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)