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mahabharat 1.108.11: कौरवों द्वारा विस्तृत उस सुन्दर जनपद में न तो कोई कंजूस था और न ही कोई विधवाएँ ही दिखाई देती थीं ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 1.108: धृतराष्ट्र आदिके जन्म तथा भीष्मजीके धर्मपूर्ण शासनसे कुरुदेशकी सर्वांगीण उन्नतिका दिग्दर्शन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 108: धृतराष्ट्र आदिके जन्म तथा भीष्मजीके धर्मपूर्ण शासनसे कुरुदेशकी सर्वांगीण उन्नतिका दिग्दर्शन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.108.11 
नाभवत् कृपण: कश्चिन्नाभवन् विधवा: स्त्रिय:।
तस्मिञ्जनपदे रम्ये कुरुभिर्बहुलीकृते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
कौरवों द्वारा विस्तृत उस सुन्दर जनपद में न तो कोई कंजूस था और न ही कोई विधवाएँ ही दिखाई देती थीं ॥11॥
 
In that beautiful district expanded by the Kauravas, neither was there any miser nor were any widows to be seen. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)