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mahabharat 1.108.10: उस समय दक्षिणकुरु देश के निवासी उत्तरकुरु में रहने वाले लोगों, देवताओं, ऋषियों और भाटों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए स्वतन्त्रतापूर्वक विचरण करते थे॥ 10॥   |   mahabharat अध्याय 1.108: धृतराष्ट्र आदिके जन्म तथा भीष्मजीके धर्मपूर्ण शासनसे कुरुदेशकी सर्वांगीण उन्नतिका दिग्दर्शन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 108: धृतराष्ट्र आदिके जन्म तथा भीष्मजीके धर्मपूर्ण शासनसे कुरुदेशकी सर्वांगीण उन्नतिका दिग्दर्शन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.108.10 
उत्तरै: कुरुभि: सार्धं दक्षिणा: कुरवस्तथा।
विस्पर्धमाना व्यचरंस्तथा देवर्षिचारणै:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उस समय दक्षिणकुरु देश के निवासी उत्तरकुरु में रहने वाले लोगों, देवताओं, ऋषियों और भाटों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए स्वतन्त्रतापूर्वक विचरण करते थे॥ 10॥
 
At that time, the inhabitants of Dakshinakuru country used to roam around freely, competing with the people, gods, sages and bards living in Uttarkuru.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)