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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 107: माण्डव्यका धर्मराजको शाप देना
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श्लोक 2
श्लोक
1.107.2
तं दृष्ट्वा रक्षिणस्तत्र तथा बहुतिथेऽहनि।
न्यवेदयंस्तथा राज्ञे यथावृत्तं नराधिप॥ २॥
अनुवाद
महाराज! उसे बहुत देर तक भाले पर बैठा देखकर पहरेदारों ने राजा के पास जाकर ज्यों-का-त्यों सारा वृत्तांत कह सुनाया॥2॥
Maharaj! After seeing him sitting on the spear for a long time, the guards went to the king and told him the whole story as it was.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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