श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 107: माण्डव्यका धर्मराजको शाप देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.107.2 
तं दृष्ट्वा रक्षिणस्तत्र तथा बहुतिथेऽहनि।
न्यवेदयंस्तथा राज्ञे यथावृत्तं नराधिप॥ २॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उसे बहुत देर तक भाले पर बैठा देखकर पहरेदारों ने राजा के पास जाकर ज्यों-का-त्यों सारा वृत्तांत कह सुनाया॥2॥
 
Maharaj! After seeing him sitting on the spear for a long time, the guards went to the king and told him the whole story as it was.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)