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mahabharat 1.107.16: अतः हे धर्म! मनुष्य होकर तू शूद्र योनि में जन्म लेगा। आज से मैं संसार में एक ऐसी आचार संहिता स्थापित कर रहा हूँ जो धर्म के फल को प्रकट करेगी।॥16॥   |   mahabharat अध्याय 1.107: माण्डव्यका धर्मराजको शाप देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 107: माण्डव्यका धर्मराजको शाप देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.107.16 
शूद्रयोनावतो धर्म मानुष: सम्भविष्यसि।
मर्यादां स्थापयाम्यद्य लोके धर्मफलोदयाम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
अतः हे धर्म! मनुष्य होकर तू शूद्र योनि में जन्म लेगा। आज से मैं संसार में एक ऐसी आचार संहिता स्थापित कर रहा हूँ जो धर्म के फल को प्रकट करेगी।॥16॥
 
Therefore, O Dharma! Being a human being you will be born as a Shudra. From today onwards I am establishing a code of conduct in the world which will reveal the fruits of Dharma. ॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)