श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 107: माण्डव्यका धर्मराजको शाप देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.107.12 
स्वल्पमेव यथा दत्तं दानं बहुगुणं भवेत्।
अधर्म एवं विप्रर्षे बहुदु:खफलप्रद:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जैसे थोड़ा-सा दान अनेक गुना फल देता है, वैसे ही पापकर्म भी अनेक गुना दुःख रूपी फल देता है॥12॥
 
Just as a small donation gives many fold results, similarly a sinful act also gives many fold results in the form of sorrow.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)