श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 107: माण्डव्यका धर्मराजको शाप देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.107.11 
धर्म उवाच
पतङ्गिकानां पुच्छेषु त्वयेषीका प्रवेशिता।
कर्मणस्तस्य ते प्राप्तं फलमेतत् तपोधन॥ ११॥
 
 
अनुवाद
धर्मराज बोले - तपोधन! तुमने फतिंगों की पूँछ में काँटा चुभाया था। उसी कर्म का यह फल तुम्हें मिला है।
 
Dharamraj said - Tapodhan! You had inserted a thorn into the tail part of the Fatingas. You have received this result of that deed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)