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mahabharat 1.106.2: वैशम्पायनजी बोले - राजन्! प्राचीन काल में माण्डव्य नाम का एक प्रसिद्ध ब्राह्मण था, जो धैर्यवान, समस्त धर्मों का ज्ञाता, सत्यवादी और तपस्वी था॥2॥   |   mahabharat अध्याय 1.106: महर्षि माण्डव्यका शूलीपर चढ़ाया जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 106: महर्षि माण्डव्यका शूलीपर चढ़ाया जाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.106.2 
वैशम्पायन उवाच
बभूव ब्राह्मण: कश्चिन्माण्डव्य इति विश्रुत:।
धृतिमान् सर्वधर्मज्ञ: सत्ये तपसि च स्थित:॥ २॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी बोले - राजन्! प्राचीन काल में माण्डव्य नाम का एक प्रसिद्ध ब्राह्मण था, जो धैर्यवान, समस्त धर्मों का ज्ञाता, सत्यवादी और तपस्वी था॥2॥
 
Vaishampayanji said – King! In ancient times, there was a famous Brahmin named Mandavya, who was patient, knowledgeable about all religions, truthful and ascetic. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)