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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 106: महर्षि माण्डव्यका शूलीपर चढ़ाया जाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.106.11 
तत: शङ्का समभवद् रक्षिणां तं मुनिं प्रति।
संयम्यैनं ततो राज्ञे दस्यूंश्चैव न्यवेदयन्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तभी पहरेदारों को ऋषि पर शक हुआ और वे उसे बाँधकर राजा के पास ले गए। वहाँ पहुँचकर उन्होंने राजा को सारी बात बताई और उन चोरों को भी राजा के हवाले कर दिया।
 
Then the guards became suspicious of the sage and they tied him up and took him to the king. After reaching there they told the king everything and also handed over those thieves to the king.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)