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mahabharat 1.105.8-9: माता के ये वचन सुनकर सत्यवतीनन्दन व्यासजी बोले - 'माते! वह दस हजार हाथियों के समान बलवान, विद्वान, राजर्षियों में श्रेष्ठ, परम भाग्यवान, महापराक्रमी और परम बुद्धिमान होगा। उस महापुरुष के सौ पुत्र भी होंगे।'   |   mahabharat अध्याय 1.105: व्यासजीके द्वारा विचित्रवीर्यके क्षेत्रसे धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुरकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 105: व्यासजीके द्वारा विचित्रवीर्यके क्षेत्रसे धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुरकी उत्पत्ति  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  1.105.8-9 
निशम्य तद् वचो मातुर्व्यास: सत्यवतीसुत:।
नागायुतसमप्राणो विद्वान् राजर्षिसत्तम:॥ ८॥
महाभागो महावीर्यो महाबुद्धिर्भविष्यति।
तस्य चापि शतं पुत्रा भविष्यन्ति महात्मन:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
माता के ये वचन सुनकर सत्यवतीनन्दन व्यासजी बोले - 'माते! वह दस हजार हाथियों के समान बलवान, विद्वान, राजर्षियों में श्रेष्ठ, परम भाग्यवान, महापराक्रमी और परम बुद्धिमान होगा। उस महापुरुष के सौ पुत्र भी होंगे।'
 
Hearing these words of the mother, Satyavatinandan Vyasji said - 'Mother! He will be as strong as ten thousand elephants, learned, best among royal sages, extremely fortunate, very brave and extremely intelligent. That great man will also have hundred sons. 8-9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)