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mahabharat 1.105.5: व्यास का शरीर श्याम वर्ण का था, उनकी जटाएँ गुलाबी रंग की थीं, उनकी आँखें चमक रही थीं और उनकी दाढ़ी-मूँछें भूरे रंग की थीं। उन्हें देखकर देवी कौशल्या ने (भय के कारण) अपनी दोनों आँखें बंद कर लीं।   |   mahabharat अध्याय 1.105: व्यासजीके द्वारा विचित्रवीर्यके क्षेत्रसे धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुरकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 105: व्यासजीके द्वारा विचित्रवीर्यके क्षेत्रसे धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुरकी उत्पत्ति  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.105.5 
तस्य कृष्णस्य कपिलां जटां दीप्ते च लोचने।
बभ्रूणि चैव श्मश्रूणि दृष्ट्वा देवी न्यमीलयत्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
व्यास का शरीर श्याम वर्ण का था, उनकी जटाएँ गुलाबी रंग की थीं, उनकी आँखें चमक रही थीं और उनकी दाढ़ी-मूँछें भूरे रंग की थीं। उन्हें देखकर देवी कौशल्या ने (भय के कारण) अपनी दोनों आँखें बंद कर लीं।
 
Vyasa's body was black in colour, his matted locks were of pink colour and his eyes were shining and his beard and moustache appeared brown in colour. Seeing him, Goddess Kausalya (out of fear) closed both her eyes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)