श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 105: व्यासजीके द्वारा विचित्रवीर्यके क्षेत्रसे धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुरकी उत्पत्ति  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.105.32 
एते विचित्रवीर्यस्य क्षेत्रे द्वैपायनादपि।
जज्ञिरे देवगर्भाभा: कुरुवंशविवर्धना:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
विचित्रवीर्य के प्रदेश में व्यासजी ने इन तीन पुत्रों को जन्म दिया, जो देवताओं के पुत्रों के समान तेजस्वी थे और कुरुवंश की वृद्धि करने वाले थे ॥ 32॥
 
In the region of Vichitravirya, Vyasa begot these three sons, who were as radiant as the sons of the gods and would increase the Kuru dynasty. ॥ 32॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि विचित्रवीर्यसुतोत्पत्तौ पञ्चाधिकशततमोऽध्याय:॥ १०५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें विचित्रवीर्यके पुत्रोंकी उत्पत्तिविषयक एक सौ पाँचवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)