विचित्रवीर्य के प्रदेश में व्यासजी ने इन तीन पुत्रों को जन्म दिया, जो देवताओं के पुत्रों के समान तेजस्वी थे और कुरुवंश की वृद्धि करने वाले थे ॥ 32॥
In the region of Vichitravirya, Vyasa begot these three sons, who were as radiant as the sons of the gods and would increase the Kuru dynasty. ॥ 32॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि विचित्रवीर्यसुतोत्पत्तौ पञ्चाधिकशततमोऽध्याय:॥ १०५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें विचित्रवीर्यके पुत्रोंकी उत्पत्तिविषयक एक सौ पाँचवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)