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mahabharat 1.105.31: इस प्रकार अपनी माता का ऋण चुकाकर (उनकी आज्ञा मानकर) व्यासजी पुनः अपनी माता सत्यवती से मिले, उन्हें उनके गर्भवती होने का समाचार सुनाया और वहाँ से अन्तर्धान हो गए ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 1.105: व्यासजीके द्वारा विचित्रवीर्यके क्षेत्रसे धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुरकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 105: व्यासजीके द्वारा विचित्रवीर्यके क्षेत्रसे धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुरकी उत्पत्ति  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.105.31 
स धर्मस्यानृणो भूत्वा पुनर्मात्रा समेत्य च।
तस्यै गर्भं समावेद्य तत्रैवान्तरधीयत॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अपनी माता का ऋण चुकाकर (उनकी आज्ञा मानकर) व्यासजी पुनः अपनी माता सत्यवती से मिले, उन्हें उनके गर्भवती होने का समाचार सुनाया और वहाँ से अन्तर्धान हो गए ॥31॥
 
Having thus repaid his debt to his mother (by obeying her orders), Vyasa again met his mother Satyavati, informed her about her pregnancy and disappeared from there. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)