श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 105: व्यासजीके द्वारा विचित्रवीर्यके क्षेत्रसे धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुरकी उत्पत्ति  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.105.29 
धर्मो विदुररूपेण शापात् तस्य महात्मन:।
माण्डव्यस्यार्थतत्त्वज्ञ: कामक्रोधविवर्जित:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
महात्मा माण्डव्य के शाप से धर्मराज ने ही विदुर के रूप में जन्म लिया था। वे अर्थशास्त्र के ज्ञाता थे और काम-क्रोध से रहित थे। 29॥
 
Due to the curse of Mahatma Mandavya, Dharamraj himself was born in the form of Vidur. He was an expert in economics and was free from lust and anger. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)