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सा तु रूपं च गन्धं च महर्षे: प्रविचिन्त्य तम्।
नाकरोद् वचनं देव्या भयात् सुरसुतोपमा॥ २३॥
अनुवाद
परंतु देवी के समान सुन्दरी अम्बिका ने महर्षि के कुरूप रूप और गंध का विचार करके भय के मारे देवी सत्यवती की बात नहीं मानी॥23॥
But Ambika, who was as beautiful as a goddess, did not obey Goddess Satyavati out of fear after thinking about the ugly form and smell of Maharishi. 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥