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mahabharat 1.105.21: तदनन्तर, समय आने पर देवी अम्बालिका ने पाण्डुवर्ण के एक पुत्र को जन्म दिया, जो अपनी दिव्य कांति से प्रकाशित हो रहा था ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 1.105: व्यासजीके द्वारा विचित्रवीर्यके क्षेत्रसे धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुरकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 105: व्यासजीके द्वारा विचित्रवीर्यके क्षेत्रसे धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुरकी उत्पत्ति  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.105.21 
तत: कुमारं सा देवी प्राप्तकालमजीजनत्।
पाण्डुं लक्षणसम्पन्नं दीप्यमानमिव श्रिया॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर, समय आने पर देवी अम्बालिका ने पाण्डुवर्ण के एक पुत्र को जन्म दिया, जो अपनी दिव्य कांति से प्रकाशित हो रहा था ॥21॥
 
Thereafter, when the time came, Goddess Ambalika gave birth to a son of Panduvarna. He was shining with his divine radiance. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)