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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 105: व्यासजीके द्वारा विचित्रवीर्यके क्षेत्रसे धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुरकी उत्पत्ति
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श्लोक 18
श्लोक
1.105.18
नाम चास्यैतदेवेह भविष्यति शुभानने।
इत्युक्त्वा स निरक्रामद् भगवानृषिसत्तम:॥ १८॥
अनुवाद
‘शुभने! इस बालक का नाम भी संसार में ‘पाण्डु’ होगा।’ ऐसा कहकर श्रेष्ठ मुनि भगवान व्यास वहाँ से चले गए॥18॥
'Shubhanane! The name of this child will also be 'Pandu' in the world.' Saying this, the best sage Lord Vyas left from there. 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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