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mahabharat 1.105.17: ‘अम्बालिका! मुझ कुरूप को देखकर तुम पीले रंग की हो गई थीं, इसलिए तुम्हारा यह पुत्र भी पीले रंग का होगा॥ 17॥   |   mahabharat अध्याय 1.105: व्यासजीके द्वारा विचित्रवीर्यके क्षेत्रसे धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुरकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 105: व्यासजीके द्वारा विचित्रवीर्यके क्षेत्रसे धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुरकी उत्पत्ति  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.105.17 
यस्मात् पाण्डुत्वमापन्ना विरूपं प्रेक्ष्य मामिह।
तस्मादेष सुतस्ते वै पाण्डुरेव भविष्यति॥ १७॥
 
 
अनुवाद
‘अम्बालिका! मुझ कुरूप को देखकर तुम पीले रंग की हो गई थीं, इसलिए तुम्हारा यह पुत्र भी पीले रंग का होगा॥ 17॥
 
‘Ambalika! On seeing me of such an ugly form you had become like pale yellow in colour, therefore this son of yours will also be of pale colour.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)