श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 105: व्यासजीके द्वारा विचित्रवीर्यके क्षेत्रसे धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुरकी उत्पत्ति  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.105.16 
तां भीतां पाण्डुसंकाशां विषण्णां प्रेक्ष्य भारत।
व्यास: सत्यवतीपुत्र इदं वचनमब्रवीत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! उसे भयभीत, दुःखी तथा पाण्डुवर्ण के समान देखकर सत्यवतीनन्दन व्यास ने इस प्रकार कहा-॥ 16॥
 
Janamejaya! Seeing him frightened, sad and looking like Pandu-Varna, Satyavatinandan Vyas said thus -॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)