श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 105: व्यासजीके द्वारा विचित्रवीर्यके क्षेत्रसे धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुरकी उत्पत्ति  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.105.12 
स तथेति प्रतिज्ञाय निश्चक्राम महायशा:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
महायशस्वी व्यासजी 'तथास्तु' कहकर वहां से चले गये। 12॥
 
Mahayashasvi Vyasji left from there saying 'Tathaastu'. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)