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mahabharat 1.105.10-12h: ‘किन्तु माता के दोष से बालक अंधा होगा।’ व्यासजी की यह बात सुनकर माता ने कहा - ‘तपधान! कुरुवंश का राजा अंधा हो, यह उचित नहीं है। अतः कुरुवंश को दूसरा राजा दीजिए, जो जाति के बंधुओं तथा सम्पूर्ण कुल का रक्षक हो तथा पिता के वंश को आगे बढ़ाए।’॥10-11 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 1.105: व्यासजीके द्वारा विचित्रवीर्यके क्षेत्रसे धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुरकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 105: व्यासजीके द्वारा विचित्रवीर्यके क्षेत्रसे धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुरकी उत्पत्ति  »  श्लोक 10-12h
 
 
श्लोक  1.105.10-12h 
किं तु मातु: स वैगुण्यादन्ध एव भविष्यति।
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा माता पुत्रमथाब्रवीत्॥ १०॥
नान्ध: कुरूणां नृपतिरनुरूपस्तपोधन।
ज्ञातिवंशस्य गोप्तारं पितॄणां वंशवर्धनम्॥ ११॥
द्वितीयं कुरुवंशस्य राजानं दातुमर्हसि।
 
 
अनुवाद
‘किन्तु माता के दोष से बालक अंधा होगा।’ व्यासजी की यह बात सुनकर माता ने कहा - ‘तपधान! कुरुवंश का राजा अंधा हो, यह उचित नहीं है। अतः कुरुवंश को दूसरा राजा दीजिए, जो जाति के बंधुओं तथा सम्पूर्ण कुल का रक्षक हो तथा पिता के वंश को आगे बढ़ाए।’॥10-11 1/2॥
 
'But due to the fault of the mother, the child will be blind.' On hearing this from Vyasa, the mother said - 'Tapadhan! It is not right that the king of the Kuru dynasty should be blind. Therefore, give another king to the Kuru dynasty, who will be the protector of the brothers of the caste and the entire clan and will carry forward the lineage of the father.'॥ 10-11 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)