Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.104.7-9: एक दिन मैं उसी नाव पर सवार होकर गई थी। वे दिन मेरे यौवन के प्रारम्भिक दिन थे। उस समय धर्मज्ञों में श्रेष्ठ महर्षि पराशर यमुना नदी पार कराने के लिए मेरी नाव पर आए। मैं उन्हें पार करा रही थी, तभी काम से पीड़ित वे महर्षि मेरे पास आए और मधुर वाणी में मुझसे बोले, मुझे समझाया और उन्होंने मुझे अपने जन्म और कुल का परिचय दिया। इस पर मैंने कहा—‘भगवन्! मैं निषाद की कन्या हूँ।’ 7–9 | mahabharat अध्याय 1.104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एक दिन मैं उसी नाव पर सवार होकर गई थी। वे दिन मेरे यौवन के प्रारम्भिक दिन थे। उस समय धर्मज्ञों में श्रेष्ठ महर्षि पराशर यमुना नदी पार कराने के लिए मेरी नाव पर आए। मैं उन्हें पार करा रही थी, तभी काम से पीड़ित वे महर्षि मेरे पास आए और मधुर वाणी में मुझसे बोले, मुझे समझाया और उन्होंने मुझे अपने जन्म और कुल का परिचय दिया। इस पर मैंने कहा—‘भगवन्! मैं निषाद की कन्या हूँ।’ 7–9
‘One day I had gone on that very boat. Those days were the beginning of my youth. At that time Maharishi Parashar, the wisest among the religious scholars, came to my boat to cross the river Yamuna. I was taking him across, when that great sage, tormented by lust, came to me and spoke to me in a sweet voice, explaining to me and he introduced me to his birth and family. On this I said—‘Lord! I am the daughter of Nishad’. 7–9.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥