Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.104.54: कौशल्या धर्म का पालन करने वाली थीं। सत्यवती ने धर्म का ध्यान रखते हुए किसी प्रकार (बड़ी कठिनाई से) उन्हें समझाया और इस कार्य के लिए तैयार किया। तत्पश्चात उन्होंने ब्राह्मणों, ऋषियों और अतिथियों को भोजन कराया। 54. | mahabharat अध्याय 1.104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कौशल्या धर्म का पालन करने वाली थीं। सत्यवती ने धर्म का ध्यान रखते हुए किसी प्रकार (बड़ी कठिनाई से) उन्हें समझाया और इस कार्य के लिए तैयार किया। तत्पश्चात उन्होंने ब्राह्मणों, ऋषियों और अतिथियों को भोजन कराया। 54.
Kausalya was a follower of Dharma. Satyavati, keeping Dharma in mind, convinced her in some way (with great difficulty) and prepared her for this task. After that, she served food to Brahmins, sages and guests. 54.
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि सत्यवत्युपदेशे चतुरधिकशततमोऽध्याय:॥ १०४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें सत्यवती-उपदेशविषयक एक सौ चारवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०४॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल ५६ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥