Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.104.5: ऐसी कठिन परिस्थिति देखकर मैं तुम्हें यह बात कहे बिना नहीं रह सकता। तुम हमारे कुल में धर्म के स्वरूप हो, तुम सत्य हो और तुम ही परम गति हो॥5॥ | mahabharat अध्याय 1.104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न ते शक्यमनाख्यातुमापद्धर्मं तथाविधम्।
त्वमेव न: कुले धर्मस्त्वं सत्यं त्वं परा गति:॥ ५॥
अनुवाद
ऐसी कठिन परिस्थिति देखकर मैं तुम्हें यह बात कहे बिना नहीं रह सकता। तुम हमारे कुल में धर्म के स्वरूप हो, तुम सत्य हो और तुम ही परम गति हो॥5॥
'Seeing such a difficult situation, I cannot refrain from telling you about it. You are the embodiment of Dharma in our clan, you are the truth and you are the ultimate goal.॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥