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mahabharat 1.104.47: यदि कौसल्या (अम्बिका) मेरी गंध, रूप, स्वरूप और शरीर को सहन कर सके, तो वह आज ही अपने गर्भ में एक अद्भुत बालक को प्राप्त कर सकती है।   |   mahabharat अध्याय 1.104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  1.104.47 
यदि मे सहते गन्धं रूपं वेषं तथा वपु:।
अद्यैव गर्भं कौसल्या विशिष्टं प्रतिपद्यताम्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
यदि कौसल्या (अम्बिका) मेरी गंध, रूप, स्वरूप और शरीर को सहन कर सके, तो वह आज ही अपने गर्भ में एक अद्भुत बालक को प्राप्त कर सकती है।
 
If Kausalya (Ambika) can tolerate my smell, form, appearance and body, she can get a wonderful child in her womb today itself.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)