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mahabharat 1.104.45: हे प्रभु! आप सोचिए, राजा के बिना राज्य कैसे सुरक्षित और अनुशासित रह सकता है? अतः शीघ्र ही गर्भधारण करें। भीष्म उस बालक का पालन-पोषण करेंगे। 45.   |   mahabharat अध्याय 1.104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  1.104.45 
कथं चाराजकं राष्ट्रं शक्यं धारयितुं प्रभो।
तस्माद् गर्भं समाधत्स्व भीष्म: संवर्धयिष्यति॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! आप सोचिए, राजा के बिना राज्य कैसे सुरक्षित और अनुशासित रह सकता है? अतः शीघ्र ही गर्भधारण करें। भीष्म उस बालक का पालन-पोषण करेंगे। 45.
 
Lord! You think, how can a kingdom remain safe and disciplined without a king. Therefore, conceive soon. Bhishma will raise the child. 45.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)