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mahabharat 1.104.42-43h: विचित्रवीर्य योनि की स्त्रियों को एक वर्ष तक मेरे बताए अनुसार व्रत (इन्द्रियों को वश में करके तथा केवल सन्तान उत्पन्न करके) करना होगा, तभी वे पवित्र होंगी। जिस स्त्री ने व्रत नहीं किया है, वह मेरे पास नहीं आ सकती।   |   mahabharat अध्याय 1.104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना  »  श्लोक 42-43h
 
 
श्लोक  1.104.42-43h 
व्रतं चरेतां ते देव्यौ निर्दिष्टमिह यन्मया।
संवत्सरं यथान्यायं तत: शुद्धे भविष्यत:॥ ४२॥
न हि मामव्रतोपेता उपेयात् काचिदङ्गना।
 
 
अनुवाद
विचित्रवीर्य योनि की स्त्रियों को एक वर्ष तक मेरे बताए अनुसार व्रत (इन्द्रियों को वश में करके तथा केवल सन्तान उत्पन्न करके) करना होगा, तभी वे पवित्र होंगी। जिस स्त्री ने व्रत नहीं किया है, वह मेरे पास नहीं आ सकती।
 
Women of Vichitravirya will have to observe the fast as prescribed by me (by controlling their senses and only having children) for one year, only then they will become pure. Any woman who has not observed the fast cannot come near me. 42 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)