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mahabharat 1.104.4: वह बोली, 'महाबाहु भीष्म! आप जो कहते हैं, वह ठीक है। चूँकि मुझे आप पर विश्वास है, अतः मैं अपने कुल की रक्षा के लिए आपसे एक बात कह रही हूँ। ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 1.104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.104.4 
सत्यमेतन्महाबाहो यथा वदसि भारत।
विश्वासात् ते प्रवक्ष्यामि संतानाय कुलस्य न:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वह बोली, 'महाबाहु भीष्म! आप जो कहते हैं, वह ठीक है। चूँकि मुझे आप पर विश्वास है, अतः मैं अपने कुल की रक्षा के लिए आपसे एक बात कह रही हूँ। ॥4॥
 
She said, 'Mahabahu Bhishma! What you say is correct. Since I have faith in you, I am telling you one thing to protect the progeny of my clan. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)