Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.104.31-34: 'विद्वान! पुत्र माता और पिता दोनों से उत्पन्न होते हैं, अतः उन पर दोनों का समान अधिकार है। जैसे पिता पुत्रों का स्वामी है, वैसे ही माता भी स्वामिनी है। इसमें संशय नहीं है। ब्रह्मर्षि! जैसे विधाता की इच्छा से अथवा मेरे पूर्वजन्मों के पुण्यों से आप मेरे प्रथम पुत्र हैं, वैसे ही विचित्रवीर्य मेरे सबसे छोटे पुत्र थे। जैसे भीष्म पिता के रूप में उनके भाई हैं, वैसे ही आप भी माता के रूप में विचित्रवीर्य के भाई हैं। पुत्र! यह मेरी मान्यता है; फिर जैसा चाहो समझ लो। ये सत्यवादी और वीर शान्तनुपुत्र भीष्म सत्य का पालन कर रहे हैं।॥31-34॥ | mahabharat अध्याय 1.104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मातापित्रो: प्रजायन्ते पुत्रा: साधारणा: कवे॥ ३१॥
तेषां पिता यथा स्वामी तथा माता न संशय:।
विधानविहित: सत्यं यथा मे प्रथम: सुत:॥ ३२॥
विचित्रवीर्यो ब्रह्मर्षे तथा मेऽवरज: सुत:।
यथैव पितृतो भीष्मस्तथा त्वमपि मातृत:॥ ३३॥
भ्राता विचित्रवीर्यस्य यथा वा पुत्र मन्यसे।
अयं शान्तनव: सत्यं पालयन् सत्यविक्रम:॥ ३४॥
अनुवाद
'विद्वान! पुत्र माता और पिता दोनों से उत्पन्न होते हैं, अतः उन पर दोनों का समान अधिकार है। जैसे पिता पुत्रों का स्वामी है, वैसे ही माता भी स्वामिनी है। इसमें संशय नहीं है। ब्रह्मर्षि! जैसे विधाता की इच्छा से अथवा मेरे पूर्वजन्मों के पुण्यों से आप मेरे प्रथम पुत्र हैं, वैसे ही विचित्रवीर्य मेरे सबसे छोटे पुत्र थे। जैसे भीष्म पिता के रूप में उनके भाई हैं, वैसे ही आप भी माता के रूप में विचित्रवीर्य के भाई हैं। पुत्र! यह मेरी मान्यता है; फिर जैसा चाहो समझ लो। ये सत्यवादी और वीर शान्तनुपुत्र भीष्म सत्य का पालन कर रहे हैं।॥31-34॥
'Learned! Sons are born from both mother and father, hence both have equal rights over them. Just as father is the master of the sons, similarly mother is also the master. There is no doubt in this. Brahmarshi! Just as you are my first son due to the will of the creator or the merits of my previous births, similarly Vichitravirya was my youngest son. Just as Bhishma is his brother as a father, similarly you are also Vichitravirya's brother as a mother. Son! This is my belief; then you can understand as you like. This truthful and brave Shantanu's son Bhishma is following the truth.॥ 31-34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥