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mahabharat 1.104.30-31h: विधिपूर्वक की गई पूजा और मंत्रोच्चार से व्यास जी बहुत प्रसन्न हुए। जब ​​वे आसन पर बैठे, तब माता सत्यवती ने उनका कुशलक्षेम पूछा और उनकी ओर देखकर इस प्रकार कहा -॥30 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 1.104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  1.104.30-31h 
पूजितो मन्त्रपूर्वं तु विधिवत् प्रीतिमाप स:।
तमासनगतं माता पृष्ट्वा कुशलमव्ययम्॥ ३०॥
सत्यवत्यथ वीक्ष्यैनमुवाचेदमनन्तरम्।
 
 
अनुवाद
विधिपूर्वक की गई पूजा और मंत्रोच्चार से व्यास जी बहुत प्रसन्न हुए। जब ​​वे आसन पर बैठे, तब माता सत्यवती ने उनका कुशलक्षेम पूछा और उनकी ओर देखकर इस प्रकार कहा -॥30 1/2॥
 
Vyasa was very pleased with the worship done as per the rituals and chanting of mantras. When he sat on the seat, mother Satyavati asked about his well-being and looking at him said this -॥ 30 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)