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mahabharat 1.104.29: तत्पश्चात पुजारी ने विधिवत अनुष्ठान एवं मंत्रोच्चार के साथ महर्षि की पूजा की और महर्षि ने उसे प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार कर लिया।   |   mahabharat अध्याय 1.104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.104.29 
तस्मै पूजां ततोऽकार्षीत् पुरोधा: परमर्षये।
स च तां प्रतिजग्राह विधिवन्मन्त्रपूर्वकम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात पुजारी ने विधिवत अनुष्ठान एवं मंत्रोच्चार के साथ महर्षि की पूजा की और महर्षि ने उसे प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार कर लिया।
 
Thereafter the priest worshipped the Maharshi with proper rituals and chanting of mantras and the Maharshi accepted it happily.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)