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mahabharat 1.104.27: तत्पश्चात् सत्यवती के प्रथम पुत्र महर्षि व्यास ने अपने कमण्डलु के पवित्र जल से उस शोकग्रस्त माता का अभिषेक किया और उन्हें प्रणाम करके इस प्रकार कहा : 27॥   |   mahabharat अध्याय 1.104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.104.27 
तामद्भि: परिषिच्यार्तां महर्षिरभिवाद्य च।
मातरं पूर्वज: पुत्रो व्यासो वचनमब्रवीत्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सत्यवती के प्रथम पुत्र महर्षि व्यास ने अपने कमण्डलु के पवित्र जल से उस शोकग्रस्त माता का अभिषेक किया और उन्हें प्रणाम करके इस प्रकार कहा : 27॥
 
Thereafter, Maharishi Vyas, the first son of Satyavati, anointed the grieving mother with the sacred water of his Kamandalu and after paying obeisance to her, said thus: 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)