Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.104.23-26: वैशम्पायन कहते हैं - कुरुपुत्र! उस समय जब भीष्म ने इस प्रकार अपनी सहमति दे दी, तब कलि (सत्यवती) को ऋषि कृष्ण द्वैपायन का स्मरण हुआ। जन्मेजय! यह जानकर कि मेरी माता ने मुझे स्मरण किया है, परम बुद्धिमान व्यासजी वेदमंत्रों का उच्चारण करते हुए क्षण भर में वहाँ प्रकट हो गए। कोई नहीं जानता था कि वे कब और कहाँ से आए हैं। सत्यवती ने अपने पुत्र का भली-भाँति स्वागत किया और उसे दोनों भुजाओं से लगाकर अपने स्तनों से बहते हुए दूध से उसका अभिषेक किया। बहुत समय के बाद अपने पुत्र को देखकर सत्यवती के नेत्रों से प्रेम और आनन्द के आँसू बहने लगे। 23-26 | mahabharat अध्याय 1.104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन कहते हैं - कुरुपुत्र! उस समय जब भीष्म ने इस प्रकार अपनी सहमति दे दी, तब कलि (सत्यवती) को ऋषि कृष्ण द्वैपायन का स्मरण हुआ। जन्मेजय! यह जानकर कि मेरी माता ने मुझे स्मरण किया है, परम बुद्धिमान व्यासजी वेदमंत्रों का उच्चारण करते हुए क्षण भर में वहाँ प्रकट हो गए। कोई नहीं जानता था कि वे कब और कहाँ से आए हैं। सत्यवती ने अपने पुत्र का भली-भाँति स्वागत किया और उसे दोनों भुजाओं से लगाकर अपने स्तनों से बहते हुए दूध से उसका अभिषेक किया। बहुत समय के बाद अपने पुत्र को देखकर सत्यवती के नेत्रों से प्रेम और आनन्द के आँसू बहने लगे। 23-26
Vaishampayana says - Son of Kuru! At that time, when Bhishma gave his consent in this manner, Kali (Satyavati) thought of sage Krishna Dwaipayana. Janmejaya! Knowing that my mother has remembered me, the very intelligent Vyasa appeared there in a moment reciting the Vedic mantras. No one knew when and from where he had come. Satyavati welcomed her son well and embracing him with both her arms, anointed him with the milk flowing from her breasts. Seeing her son after a long time, tears of love and joy started flowing from Satyavati's eyes. 23-26.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥